भारत एक ऐसा देश है जहां क्रिकेट देखने वाले और क्रिकेट खेलने वालों की कोई कमी नहीं है और यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट टीम आज इतनी सफल टीम बन सकी ना केवल एक फार्मेट बल्कि हर फॉर्मेट में इंडियन टीम का लगातार कमाल का प्रदर्शन रहा है।

इसके पीछे सबसे मुख्य वजह है भारत की बेंच स्ट्रेंथ। देखा जाए तो भारत में हर खिलाड़ी को रिप्लेस करने के लिए पहले से ही कई खिलाड़ी हैं और इसी वजह से टीम लगातार कई सालों से क्रिकेटिंग वल्र्ड में छाई हुई है।

टीमें इतने कमाल की प्लेयर्स होने की वजह से अच्छे खिलाड़ियों को भी टीम में खेलने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। पर आपमें अगर टैलेंट है तो आप किसी ना किसी तरीके से अपनी छाप छोड़ी जाती हैं।

हम बात कर रहे हैं एक ऐसे शानदार खिलाड़ी की जिसको टीम में आने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। लेकिन जब उन्होंने अपने करियर की पहली बॉल खेली तो उस पर छक्का जड़ दिया और लोगों को बता दिया कि वो कितने शानदार बल्लेबाज हैं।

हम बात कर रहे हैं फैन्स के फेवरेट कहे जाने वाले सूर्यकुमार यादव की। सूर्यकुमार यादव ये नाम आपमें से ज्यादातर लोगों ने सुना ही होगा। ये डोमेस्टिक क्रिकेट में मुम्बई के लिए और आईपीएल में मुम्बई इंडियंस के लिए खेलते हैं। इन्होंने अपने कमाल की बल्लेबाजी के दम पर ना केवल इंडिया में बल्कि इंडिया के बाहर भी अपने हजारों फैन्स बना लिए हैं।

सूर्यकुमार यादव मिडल ऑर्डर की सबसे कमाल की बल्लेबाजों में से एक मानी जाती है जिसका एक नमूना हम सबने इनकी डेब्यू पारी में भी देख लिया। आप में से बहुत से लोगों ने उनके करियर को तो देखा है पर इनके स्ट्रगल को नहीं। इस पोस्ट में स्काय के नाम से मशहूर सूर्यकुमार यादव के जीवन की कहानी को जानने की कोशिश करेंगे कि किस तरह से उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर ये मुकाम हासिल करा।

सूर्यकुमार यादव की जीवन परिचय – Suryakumar Yadav Biography In Hindi

सूर्यकुमार यादव का जन्म 14 सितंबर 1990 को हुआ। इनके पिता का नाम अशोक यादव और उनकी मां का नाम सपना यादव हैं। सूर्यकुमार यादव के पिता मुख्य रूप से वाराणसी से आते हैं। इनके पिता बीएआरसी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और इसी वजह से सूर्यकुमार का पूरा जीवन मुम्बई में ही बीता। क्यूंकि इनके पिता ज्यादातर समय मुम्बई में ही पोस्टेड थे।

सूर्यकुमार यादव को बचपन से ही स्पोर्ट्स का भी काफी शौक था। वो काफी कम उम्र से ही क्रिकेट में काफी इंटरेस्टेड रहते थे ना केवल क्रिकेट बल्कि सूर्य को बैडमिंटन भी खूब पसंद था और वो दोनों खेल बड़े ही लगाव के साथ खेला करते थे। पर सूर्य कुमार के पिता जानती थी कि अगर सूर्य को किसी एक खेल में आगे जाना है तो उसको सिर्फ एक ही स्पोर्ट पर फोकस करना होगा और साथ ही में सूर्य कुमार सिर्फ 10 साल के ही थे जब उन्होंने अपने स्कूल की तरफ से खेलना शुरू कर दिया था और 10 साल की उम्र में ही उनके पिता ने उनकी क्रिकेट टीम भी ज्वाइन करा दिया था। इससे वो अपनी स्किल्स को और भी बेहतर बना सकीं।

सूर्यकुमार यादव को क्रिकेट से लगाव तो वैसे ही था इसलिए वे क्रिकेट को सिर्फ मस्ती के लिए ही खेला करते थे। इस प्रैक्टिस के साथ उनका गेम भी बेहतर होता जा रहा था। जब सूर्य 12 साल के थे तब उनके कोच ने उनमें वो प्रतिभा देखी जो व्यक्ति को बड़ा खिलाड़ी बनाती है। कोई भी खिलाड़ी खेल के प्रति डेडिकेशन के दम पर ही बड़ा प्लेयर बन पाता है और सूर्यकुमार यादव में वो डेडीकेशन थी। खेल के प्रति वो जज़्बा था। वो गेम में खुद को बहुत कम उम्र से ही पूरा झोंक दिया करते थे और पूरी पारी को अपनी पूरी जान से खेला करते थे।

इसके बाद वो एल्फ वेंगसरकर अकादमी में चले गए जहां उनको दिलीप वेंगसरकर जैसे कोच से गाइडेंस मिला और इस गाइडेंस के दम पर सूर्य खुद को बेहतर खिलाड़ी बनाने में लग गए। टैलेंटेड प्लेयर होने की वजह से सूर्यकुमार यादव ने अलग अलग एज के सारे टूर्नामेंट्स खेली। पर उनका सपना हमेशा से ही देश के लिए खेलने का था और देश के लिए खेलना है तो तुमको सर्वश्रेष्ठ बनना था। इसके लिए वो खूब मेहनत करने लगे।

सूर्य को उनकी मेहनत का रिजल्ट 11 फरवरी 2010 को मिला जब वो पहली बार मुम्बई की ओर से लिस्ट मैच में उतरे। अपने विजय हजारे ट्रॉफी के पहले मैच में मुम्बई की ओर से खेलते हुए सूर्यकुमार यादव ने गुजरात के खिलाफ 41 रनों की शानदार पारी खेली। इसके कुछ महीनों बाद वो मुम्बई के लिए सही मुश्ताक अली ट्रॉफी खेलते हुए नजर आए। जँहा कोई डिमार्केशन परफॉमेंस नहीं दे पाए।

2010 के अंत में उनको एक बार फिर से अपना जोर दिखाने का मौका मिला और दिल्ली के खिलाफ अपने डेब्यू फर्स्ट क्लास मैच में सूर्या ने 73 रनों की शानदार पारी खेली। इस कमाल के फर्स्ट क्लास डेब्यू से सूर्य ने बता दिया कि वो कितने कमाल के बल्लेबाज हैं।

शानदार डेब्यू के बाद 2011, 2012 रणजी सीजन में मुम्बई की ओर से सूर्या नहीं कंसिस्टेंसी पफोन करा और नाम आज में 754 रन बनाए। इसमें उन्होंने एक डबल सेन्चुरी भी लगाई और बताया कि वो किस दर्जे के खिलाड़ी हैं। रणजी में वो मुम्बई की ओर से हाईएस्ट रन स्कोरर भी बने। 2011 सीजन में अंडर 23 लेवल पर उन्होंने हजार से भी ज्यादा रन बनाए।

जिसकी वजह से उनको एमए चिदंबरम ट्रॉफी भी मिली।डोमेस्टिक में लगातार शानदार प्रदर्शन की वजह से उनको 2012 में मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में ले लिया पर बड़े खिलाड़ियों की मौजूदगी की वजह से उनको खेलने का मौका नहीं मिल पा रहा था। 2014 के आईपीएल ऑक्शन में वो कोलकाता नाइटराइडर्स में चले गए जो उन्होंने कमाल का प्रदर्शन करना शुरू करा सूर्या केकेआर के लिए निचले क्रम में बल्लेबाजी करते थे जिस वजह से उनका टैलेंट अभी भी पूरी तरह से निखरकर सामने नहीं आ पा रहा था।

2018 के आईपीएल सीजन के लिए वो वापस से मुम्बई इंडियंस में आ गए। मुम्बई इंडियंस ने सूर्या को अपनी टीम में लेने के लिए 3.2 करोड देने पड़े। 2018 में उनको मुम्बई इंडियंस से खेलने का मौका मिला। इस बार उनको निचले क्रम की जगह टॉप ऑर्डर में खिलाया गया जिसका उन्होंने बखूबी संभाल कर रखा और इस ऑपेरचनिटी का उन्होंने बखूबी इस्तेमाल करा और खूब रन भी बनाए।

वो अपना प्रदर्शन 2019 और 2020 के आईपीएल सीजन में भी दोहराने में सफल रहे और मुम्बई इंडियंस को 2019 और 20 की ट्रोफी जिताने में अहम भूमिका निभाई। डोमेस्टिक और आईपीएल में लगातार अच्छे प्रदर्शन की वजह से उनको इंग्लैंड के खिलाफ t20 सीरीज में ले लिया गया जहां उन्होंने 14 मार्च 2021 को अपना t20 डेब्यू किया। इस मैच में उनकी बैटिंग नहीं आई पर जब वह 18 मार्च 2021 को अपने दूसरे मैच में इंग्लैंड के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरे तो उन्होंने अपनी डेब्यू इनिंग्स की पहली बॉल पर ही एक शानदार छक्का लगाया और कुछ इस तरह से अपने इंटरनैशनल करियर का आगाज करा।

अपनी डेब्यू इनिंग्स में सूर्या ने शानदार हाफ सेंचुरी लगाई और अपनी टीम को जीत दिलाई। ये सूर्य अभी सिर्फ उदय हुआ है। अब इसको आगे काफी ऊँचाइयों को छूना है। हम उम्मीद करते हैं वो इसी तरह टीम के लिए आगे भी मैच विनिंग नॉक्स खेलते रहेंगे और हम सबको एंटरटेन करते रहेंगे।

सूर्यकुमार यादव के अब ऐज कितनी है?

सूर्यकुमार यादव का जन्म 14 सितंबर 1990 को हुआ था और अब उनका ऐज 30 साल है।

सूर्यकुमार यादव के वाइफ का नाम क्या है?

सूर्यकुमार यादव का वाइफ का नाम देविषा शेट्टी है।

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