SIF Full Form In Hindi – सिप क्या होता है?

आपको HindiMePro वेबसाइट में स्वागत है। इस पोस्ट में मेने सिप क्या होता है, सिप का फुल फ्रॉम क्या है, सिप का पूरा नाम क्या है, SIF Full Form, SIF Full Form In Hindi, सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान का मतलब क्या है, सिप काम कैसे करता है, सिप इन्वेस्टमेंट फीचर्स के बारे में बताया है।

सिप क्या होता है?

सिप का फुल फॉर्म है Systematic Investment Plan और आप इसको एक तरीके का जरिया मान लीजिए जिसके जरिए आप म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं और सिप प्लान के जरिए आप आसानी से फ्लेक्सिबल तरीके से और स्मार्ट तरीके से इनवेस्टमेंट कर सकते हैं। और इन्हीं खूबियों की वजह से सिप इन्वेस्टमेंट प्लान जो है वो बहुत ही पॉपुलर है।

सिप का फुल फॉर्म – SIF Full Form In Hindi

SIF Full Form In Finance

वित्त में सिप का फुल फॉर्म Systematic Investment Plan है।

SIF Full Form In Computing

कम्प्यूटिंग में सिप का फुल फॉर्म Session Initiation Protocol है।

SIF Full Form In Rules & Regulations

नियम और विनियम में सिप का फुल फॉर्म State Implementation Plan है।

SIF Full Form In Electronics

इलेक्ट्रानिक्स में सिप का फुल फॉर्म System in Package है।

SIF Full Form In Architecture & Constructions

वास्तुकला और निर्माण में सिप का फुल फॉर्म Structural Insulated Panel है।

SIF Full Form In General Computing

सामान्य कम्प्यूटिंग में सिप का फुल फॉर्म System Integrity Protection है।

SIF Full Form In Biology

जीवविज्ञान में सिप का फुल फॉर्म Stable-Isotope Probing है।

SIF Full Form In Rules & Regulations

नियम और विनियम में सिप का फुल फॉर्म Shelter-In-Place है।

SIF Full Form In Airport Codes

हवाई अड्डा कोड में सिप का फुल फॉर्म Simferopol International Airport है।

SIF Full Form In Places

स्थानों में सिप का फुल फॉर्म Suzhou Industrial Park है।

सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान का मतलब

तो सिप इन्वेस्टमेंट मोड के जरिए आप रेगुलर इनवेस्टमेंट कर सकते हैं म्यूचुअल फंड्स में जँहा पर आपके पास ऑप्शन रहेगा कि एक प्री डेटरमाइंड अमाउंट को आप पर रेगुलर इंटरवल में इन्वेस्ट करें।

और ये प्री डेटरमाइंड अमाउंट 500 रुपये हो सकता 1000 हो सकता है 10000 लाख दो लाख कुछ भी हो सकता है। 

और इसे प्री डेटरमाइंड अमाउंट को आप रेगुलर इंटरवल यानी विकली बेसिस पर मंथली बेसिस पर या क्वार्टरली बेसिस ये इयरली बेसिस पर भी आप रेगुलर इनवेस्टमेंट कर सकते हैं।

और यहां पर कितना इनवेस्ट करना है और कब करना है वो ऑलरेडी प्री डेटरमाइंड होता है जिसकी वजह से सिप जो है वो इनवेस्टमेंट करने का प्लान्ड अप्रोच बन जाता है।

और इसे प्लान्ड अप्रोच की वजह से आप ऑटोमैटिकली सेविंग्स का जो हैबिट होता है उसको डेवलप करते हो और जिसको स्मार्ट तरीके से इनवेस्ट करके आप फ्यूचर के लिए वेल्थ बिल्ड भी करते हो।

सिप काम कैसे करता है?

तो सिप का काम करने का तरीका बहुत ही सिंपल है। सबसे पहले आपको ये डिसाइड करना है कि आपको कितना पैसा इनवेस्ट करना है।

तो यंहा पर मान लीजिए आप 10 हजार रुपये इनवेस्ट करना चाहते हैं और उसके बाद आपको डिसाइड करना होता है कि आपको ये 10 हजार रुपये कब इनवेस्ट करना है।

मतलब आपको वीकली करना है मंथली इनवेस्ट करना है क्वार्टरली करना है या इयरली करना है वो आपको डिसाइड करना है तो यंहा पर यजुम कर लेते हैं कि आप मंथली इनवेस्टमेंट करना चाहते हैं तो एक बार आपने ये डिसाइड कर लिया और आपने म्यूचुअल फंड का स्कीम चुन लिया तो उसके बाद ऑटोमैटिकली आपके अकाउंट से हर महीना 10 हजार रुपये ऑटोमैटिकली कट जाएंगे और उस स्पेशफी म्यूच्यूअल स्कीम में ऑटोमैटिकली इनवेस्ट हो जाएंगे।

और जब आपका पैसा उस म्यूचुअल फंड स्कीम में इनवेस्ट होगा तो उस पैसे से म्यूचुअल फंड खरीदारी करेगा उस मार्केट में फटाफट करेंट प्राइस और उसके बदले में आपको कुछ शॉर्ट नंबर्स ऑफर म्यूचुअल फंड के यूनिट्स असाइन किए जाते हैं।

और ये म्यूचुअल फंड यूनिट्स ये जो असली इनवेस्टमेंट है म्यूचुअल फंड का मार्केट में उसको रिप्रेजेंट करता है और हर महीना जब आप पैसा इनवेस्ट करेंगे और उन पैसों को म्यूचुअल फंड मार्केट में इन्वेस्ट करने जाएगा तो हर महीना प्राइस भी डिफरेंट रहेगा मार्केट में जिसे आपकी खरीदारी मार्केट में अलग अलग प्राइसेज पर होगा जिससे इनवेस्टर्स को रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिल जाता है।

और जब आप सिप इन्वेस्टमेंट के जरिये इनवेस्टमेंट करना शुरू करते हैं तो आपको पावर ऑफ कंपाउंडिंग का एडवांटेज भी मिलेगा।

रुपी कॉस्ट एवरेजिंग और पावर ऑफ कंपाउंडिंग क्या होता है?

मान लीजिए आपका जो 10 हजार रुपये का सिप इन्वेस्टमेंट है वो आप म्यूचुअल फंड के बदले एक स्टॉक में इनवेस्ट करने का निर्णय लेते हैं और उस स्टॉक का प्राइज 10 हजार रुपये होता है तो इस महीना जब आप सिप इन्वेस्टमेंट करेंगे तो आपके 10 हजार रुपये के सिप इन्वेस्टमेंट के बदले आपको उस कंपनी के 10 शेयर्स मिलेंगे।

और मान लीजिए जब अगले महीने जब आप सिप इन्वेस्टमेंट करने जाएंगे तो उस टाइम उस स्टॉक का प्राइज 2 हजार रुपये होगा तब आप सिप इन्वेस्टमेंट के बदले आपको उस कंपनी के 5 शेयर्स मिलेंगे और उसे अगले महीने जब आप इनवेस्ट करने जाएंगे तो शेयर का प्राइज 2 हजार से नीचे गिर के 500 रुपये हो जाता है।

तब आपके 10 हजार रुपये के सिप इनवेस्टमेंट के बदले आपको उस कंपनी के 20 शेयर्स मिलेंगे तो यहां पर एक कॉमन पैटर्न अगर आप नोटिस कर रहे हैं तो आपका जो इनवेस्टमेंट होता है वो फिक्स्ड होता है हर महीना और यहां पर आपका हर महीने का इनवेस्टमेंट फिक्स्ड होने के कारण जब मार्केट नीचे जाता है तो ऑटोमैटिकली आपकी खरीदारी ज्यादा हो जाती है।

जहां पर आपको ज्यादा शेयर्स मिलते हैं और जब मार्केट ऊपर होता है तो आपकी खरीदारी ऑटोमैटिकली कम हो जाती है और आपको कम शेयर्स खरीदते हो और इसका एडवांटेज क्या होगा चाहे मार्केट ऊपर जाए या नीचे गिरे आपका एवरेज बाइंग प्राइस जो है वो बैलेंस होता रहेगा।

और इसी को हम टेक्निकल टर्म में बोलते हैं रुपी कॉस्ट एवरेजिंग और जब वापस सिप के जरिए म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्ट करते हैं तो आपको रुपी कॉस्ट एडवांटेज का फायदा मिलेगा जिससे चाहे मार्केट ऊपर जाए या नीचे गिरे आप निश्चिन्त होके अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।

सिप इन्वेस्टमेंट फीचर्स

  • सिप इन्वेस्टमेंट जो होता है वो हमेशा ओपन एंडेड फंड्स में ही होता है। मतलब आप जब चाहे अपना पैसा बाहर निकाल सकते हैं।
  • आपका कोई भी टेन्योर फिक्स नहीं होता है। मतलब आपको इतने साल तक ही इनवेस्ट करना है इतने साल तक का कमिटमेंट पीरियड में ऐसा कुछ नहीं होता है।
  • मान लीजिए आपने कोई टेन्योर चूज कर लिया। मान लीजिए आपने बता दिया कि मैं पांच साल करूंगा और ये टेन्योर चूज करने के बाद भी आप कभी भी अपना सिप इनवेस्टमेंट रोक सकते हैं और वही दूसरी तरफ मान लीजिए आपका जो पांच साल टेन्योर है वो कंप्लीट हो गया है वो कंप्लीट होने के बाद भी आप अपने म्युचुअल फंड कंपनी को बता के उस टेन्योर को जब चाहें इंक्रीज भी करवा सकते हैं।
  • आप परपेच्यूअल सिप में भी इनवेस्ट कर सकते है जहां पर कोई भी एन्ड टेन्योर नहीं होता है मतलब आप जितना लंबा चाहे उतना आप इन्वेस्ट कर सकते हैं।
  • टेन्योर खत्म होने से पहले या टेन्योर खत्म होने के बाद आप जब चाहें अपना जो पैसा है वो पारसोली या फुल्ली विथड्रॉ कर सकता है।
  • आप जब चाहें अपना जो सिप इन्वेस्टमेंट है उसको रिड्यूस कर सकते हैं और उसको इंक्रीज भी कर सकता है।

सिप में क्यों इन्वेस्टमेंट करें?

  • आपकी मदद करेगा मार्केट वोलैटिलिटी को मैनेज करने में।
  • आपके जो फाइनेंशल डिसीजन होते हैं उसको डिसिप्लिन करने के लिए सिप एक बेहतरीन जरिया होगा।
  • इन्वेस्टमेंट करने के लिए कोई भी चार्जेस नहीं होंगे।
  • आपको कंपाउंड इंटरेस्ट का बेनिफिट मिलेगा।
  • इनवेस्टमेंट अमाउंट ज्यादा नहीं है। आप 500 रुपये तक का अमाउंट से भी सिप इन्वेस्टमेंट स्टार्ट कर सकते हैं।

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