Updated On June 18th, 2021

आपको HindiMePro वेबसाइट में स्वागत है। इस पोस्ट में मेने पेन को हिंदी में क्या कहते हैं, पेन को संस्कृत में क्या कहते हैं, बॉल पेन मीनिंग इन हिंदी, बॉल पेन के इतिहास के बारे में बताया है।

पेन को हिंदी में क्या कहते हैं?

पेन को हिंदी में कलम कहते है।

पेन को संस्कृत में क्या कहते हैं

पेन को संस्कृत में लेखनी कहते है।

बॉल पेन के इतिहास

दोस्तों आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि पूरी दुनिया में प्रत्येक दिन लाखो लोगो द्वारा प्रयोग किए जाने वाले बॉल पैड पेन का इतिहास लगभग 8 दशक पुराना है। इस पेन का आविष्कार 1931 में लेडिस लाओ जोस ब्यूरो द्वारा किया गया था जिसके नाम पर स्पेन को ब्यूरो पेन के नाम से भी जाना जाता है। लेडिस लाओ जोस ब्यूरो का जन्म 1899 में हंगरी के बुडापेस्ट शहर में एक यहूदी परिवार में हुआ था और वो पेशे से पत्रकार चित्रकार और अविष्कारक भी थे। बाद में उन्होंने अपना नाम लाजो जोसेफ बीरू रख लिया था और वो इसी नाम से काफी प्रसिद्ध हुए थे।

जोस ब्यूरो फाउंटेन पेन से लिखते समय होने वाले धब्बों से काफी परेशान थे। उनके मन में तभी एक ऐसा पेन बनाने का विचार आया जिसकी स्याह जल्दी सूख जाती हो और लिखने पर धब्बे भी न पड़े। हंगरी में पत्रकार के रूप में कार्य करते समय उन्होंने देखा कि अखबारों की छपाई में जिस स्याही का प्रयोग किया जाता था वो जल्दी सूखती थी और उससे कागज पर धब्बे नहीं पड़ते थे।

इसके लिए उन्होंने फाउंटेन पेन में जल्द सूखने वाले अखबारी स्याही का उपयोग किया था लेकिन ये प्रयोग सफल नहीं हुआ क्योंकि ये स्याही बहुत मोटी थी जिसे नीव की नोक तक पहुँचने में बहुत समय लगता था। उन्होंने एक बॉल पेंट नीव का आविष्कार किया जिसपर स्याही की एक पतली फिल्म लेपित की गई थी। और जब नीब का कागज के साथ संपर्क होता था तो इसकी गेंद यानि बॉल या फिर जिसको हम नीव का बॉल कहते हैं घूमने लगती थी और काँटे से स्याही प्राप्त करती थी जिससे लिखने का काम आसान हो जाता था।

वर्तमान समय में बॉल पैड पेन का नीव सामंता पीतल स्टील या टंगस्टन कार्बाइड जैसे धातुओं से बनता है। जोस ब्यूरो ने सही स्याही के लिए अपने भाई जॉर्ज ब्यूरो की मदद ली थी जिसकी दवा की दुकान थी। इस जोड़ी ने 15 जुलाई 1938 को इस पैन को बीरो नाम से पेटेंट करवाया। अभी भी ब्रिटेन आयरलैंड आस्ट्रेलिया और इटली जैसे देशों में इस कलम को बीरो पेन ही कहा जाता है जबकि अमेरिका में से बॉल प्वाइंट पेन के नाम से जाना जाता है।

1940 में हंगरी पर नाजियों के कब्जे के कारण जोस वरो को देश छोड़ना पड़ गया और वो अर्जेन्टीना चले गए जहां उन्होंने बीरो पेन को वाणिज्यिक उत्पाद के रूप में प्रचारित किया। बायो ग्राफिकल डिक्शनरी आफ द हिस्ट्री और टेक्नोलॉजी के अनुसार स्पेन के पहले निर्माता ब्रिटिश एकाउंटेंट हेनरी जॉर्ज मार्टिन थे। इस पेन का सबसे पहला खरीददार ब्रिटेन का रॉयल एयर फोर्स था।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस संगठन ने 30 हजार बीरो पेन के आर्डर दिए थे क्योंकि ये पैन पारंपरिक फाउंटेन पेन के विपरीत अधिक उंचाई पर आसानी से काम करता था। आज बीआईसी क्रिस्टल बीरो दुनिया का सबसे लोकप्रिय पेन बन चुका है।

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