एमआरआई स्कैन ( MRI ) का फुल फॉर्म क्या है? – एमआरआई स्कैन क्या होता है?

आपको Hindimepro वेबसाइट में स्वागत है। इस पोस्ट में मेने एमआरआई स्कैन क्या होता है, एमआरआई स्कैन का फुल फॉर्म क्या है, MRI Scan Full Form In Hindi, MRI Scan Full Form, एमआरआई स्कैन का मतलब क्या है, एमआरआई स्कैन क्यों किया जाता है, एमआरआई स्कैन कैसे होता है बारे में बताया है।

एमआरआई स्कैन क्या होता है?

एमआरआई का फुल फॉर्म Magnetic Resonance Imaging है जिसे हिन्दी में चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग कहा जाता है। एमआरआई स्कैन में पावरफुल मैग्नेटिक, रेडियो वेव्स और कंप्यूटर से आपके शरीर के अंदर के अंगों का फोटो लिया जाता है। ये हमारे शरीर में मौजूद छोटे छोटे प्रोटोन को एक साथ मिला करके उनका फोटो लेता है।

MRI Scan Full Form In Hindi – एमआरआई स्कैन का फुल फॉर्म क्या है?

MRI Full Form In Medical

मेडिकल में MRI का फुल फॉर्म Magnetic Resonance Imaging है।

MRI Full Form In Hospitals

अस्पताल में MRI का फुल फॉर्म Manchester Royal Infirmary है।

MRI Full Form In Healthcare

स्वास्थ्य देखभाल में MRI का फुल फॉर्म Mental Research Institute है।

MRI Full Form In Research & Development

अनुसंधान एवं विकास में MRI का फुल फॉर्म Midwest Research Institute है।

MRI Full Form In Pets & Domesticated

पालतू और पालतू में MRI का फुल फॉर्म Meuse-Rhine-Issel है।

MRI Full Form In Medicines & Drugs

दवाओं और दवाओं में MRI का फुल फॉर्म Monoamine Reuptake Inhibitor है।

MRI Full Form In Religious Organizations

धार्मिक आयोजन में MRI का फुल फॉर्म Maritime Rescue Institute है।

एमआरआई स्कैन क्यों किया जाता है?

एमआरआई के विकास ने मेडिकल दुनिया को काफी आगे पहुंचा दिया है क्योंकि इसकी मदद से डॉक्टर शरीर में किसी भी तरह का इक्विपमेंट पहुंचाए बिना अंदरूनी अंगों को काफी सटीकता से देख सकते हैं।

एमआरआई स्कैन रोग और चोट का इलाज करने में डॉक्टरों की मदद करता है। इसकी मदद से ये भी नजर रखी जाती है कि मरीज में उपचार कितने अच्छे से काम कर रहा है। ये जांच करने के लिए कि जवाब कुछ खास काम करते हैं तो ब्रेन का कौन सा हिस्सा ज्यादा गतिशील रहता है तब भी इस टेस्ट का इस्तमाल किया जाता है।

एमआरआई स्कैन ब्रेन से जुड़ी हुई प्रॉब्लम्स का पता लगा लेता है जैसे कि स्ट्रोक वगैरा मिर्गी या ब्रेन में ट्यूमर होने पर अगर ब्रेन सर्जरी की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए एमआरआई की मदद से ब्रेन मैपिंग किया जाता है। उपचार की योजना तैयार करने के लिए भी डॉक्टर एमआरआई का इस्तमाल करते हैं।

एमआरआई स्कैन कैसे होता है?

जब भी किसी आदमी का एमआरआई स्कैन किया जाता है और उस स्कैन को करने के लिए डॉक्टर उस आदमी के सभी कपड़े उतरवा कर उसे अपना एक अलग किस्म का कपड़ा देते हैं और एमआरआई स्कैन किया जाता है तो समय में उसकी सभी मैटल की चीजें निकलवा दी जाती हैं जैसे कि घड़ी चेन अंगूठी या किसी भी तरह के गले में पहने गहने।

ये सारी चीजें उतरवा दी जाती हैं और इसके बाद उस आदमी को एमआरआई स्कैन मशीन के टेबल होती है उसके ऊपर लिटाया जाता है और फिर उसको उस मशीन के अंदर भेज दिया जाता है जिसके बाद वो मशीन शक्तिशाली मैग्नेट रेडियो तरंगों और कंप्यूटर से उस इंसान की बॉडी के अंदर की पिक्चर्स लेती हैं जोकि इंसान की बॉडी में छोटे छोटे प्रोटोन होते हैं। उस स्कैन के होने पर डॉक्टर आसानी से पता लगा सकते हैं कि इंसान की बॉडी में कौन सी बीमारी है और ये बीमारी कितनी पुरानी हो सकती है।

अगर मैं आपको आसान सी भाषा में बताऊं कि एमआरआई स्कैन क्या होता है तो एमआरआई स्कैन का सीधा मतलब यह होता है कि एक ऐसी मशीन होती है जो हमारे शरीर के अंदरूनी भागों का फोटो लेती है।

ये हमारे शरीर में माइक्रो से माइक्रो चीजों का भी पता लगा लेती है। प्रेग्नेंट महिलाओं को हमेशा अपने डॉक्टर या टेक्नोलॉजिस्ट को बताना चाहिए कि मैं प्रेग्नेंट हूं ताकि प्रेग्नेंट महिलाओं या उनके अजन्मे बच्चों पर इसका कोई बुरा इफेक्ट न हो। अगर आप पूरी बॉडी का एमआरआई स्कैन नहीं करवाना चाहते हैं तो जिस जगह पर चोट लगी है या जिस जगह पर कोई बीमारी है आप उसी का एमआरआई स्कैन करा सकते हैं।

आप अपने शरीर के अलग अलग भावों का भी एमआरआई स्कैन करा सकते हैं। इसने ब्रेन, चेस्ट या किसी भी तरह की हड्डी, कंधे, घुटने और शरीर के अलग अलग भागों का एमआरआई स्कैन करवाया जा सकता है। अगर आप अपनी बॉडी का पूरा एमआरआई स्कैन करवाना चाहते हैं तो आप वो भी करवा सकते हैं। इससे ये फायदा होता है कि अगर आपके शरीर में कोई दूसरी बीमारी है तो उसका भी पता लगाया जा सकता है। अगर आप किसी एक भाग का एमआरआई स्कैन कराते हैं तो इससे बॉडी के दूसरे भागों की बीमारियों का पता नहीं लगाया जा सकता है।

एमआरआई स्कैन के समय कौन कौन सी चीजें आपको ध्यान रखनी चाहिए?

जब आप एमआरआई स्कैन करवाते हैं तो ऐसे में आपको डॉक्टर को अपनी पूरी जानकारी दे देनी चाहिए जैसे कि अगर आपने कई पर टैटू बनवाया हुआ है या आपने अपने दांत या कान में किसी तरह की कोई चीज डलवाई हुई है तो उसके बारे में भी आपको बता देना चाहिए।

अगर आपकी किसी हड्डी में किसी भी तरह के लोहे या फिर मैटल की कोई चीज डली हुई है तो उसके बारे में भी आपको डॉक्टर को बता देना चाहिए। अगर आपको किसी तरह की एलर्जी है या किसी तरह की आपने सर्जरी करवा रखी है तो उसके बारे में भी आपको डॉक्टर को बता देना चाहिए।

अगर आप पहले से किसी दवाई का इस्तमाल कर रहे हैं तो उसके बारे में भी आपको डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। एमआरआई के कमरे में किसी भी मेटल की अनुमति नहीं होती है क्योंकि मशीन में चुम्बकीय क्षेत्र धातु को अट्रैक्ट कर सकते हैं। अपने डॉक्टर को आपको पहले ही बता देना चाहिए कि आपके पास कोई मैटल का इक्विपमेंट है जोकि टेस्ट के दौरान प्रॉब्लम पैदा कर सकता है।

आपको एमआरआई स्कैन से पहले 4 घंटे तक कुछ भी खाने या पीने के लिए मना किया जा सकता है और कभी कभी आपको पहले से बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पीने के लिए कहा जा सकता है। ये स्कैन होने वाले और इन पर डिपेंड करता है। जिन मरीजों में धातु यानी मेटल के कुछ ऑब्जेक्ट होते हैं उनमें एमआरआई से पहले एक्सरे की जरूरत पड़ती है।

आप किसी भी छर्रे गोलियों या धातु के दो से टुकड़ों के टेक्नोलॉजिस्ट या रेडियोलॉजिस्ट को सूचित कर सकते हैं। वैसे तो एमआरआई स्कैन में किसी भी तरह का दर्द नहीं होता है लेकिन अगर कॉन्ट्रास्ट की जरूरत होती है तो थोड़ा दर्द जरूर होता है। इसके लिए कॉन्टैक्ट फाइल भी दिया जाता है और इस टेस्ट को करने में वैसे तो बहुत टाइम लगता है क्योंकि एक लंबा टेस्ट होता है। इसमें आपको 30 से लेकर 90 मिनट तक का समय लग सकता है।

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