आपको HindiMePro वेबसाइट में स्वागत है। इस पोस्ट में मेने मोबाइल का अर्थ हिंदी में, मोबाइल क्या है हिंदी में, मोबाइल का फुल फॉर्म क्या है, भारत में मोबाइल फोन का इतिहास बारे में बताया है।

मोबाइल क्या है हिंदी में

मोबाइल एक इलेक्ट्रॉनिक वायरलेस डिवाइस है जिसके मदत से एक आदमी एक जगा पे है और एक आदमी दुरसी जगा पे है फिर भी मोबाइल के द्वारा एक दूसरे से बात कर सकते है।

पहले मोबाइल को सिर्फ बात चित करने में इस्तीनल किया जाता था लेकिन धीरे धीरे मोबाइल को स्मार्टफोन में कन्वर्ट किया गया फिर स्मार्टफोन के द्वारा बात चित करने के अलाबा, वीडियो देकना, इंटरनेट चलना,ईमेल करना सब कुछ मोबाइल से कर सकते हो।

मोबाइल को हिंदी में क्या कहते हैं?

मोबाइल को हिंदी में दूर्भाषक कहते है।

मोबाइल का फुल फॉर्म क्या है?

मोबाइल का फुल फॉर्म Modified Operation Byte Integration Limited Energy है।

मोबाइल फोन का इतिहास

दुनिया के पहले मोबाइल फोन का निर्माण मार्टिन कूपर नामक एक अमेरिकी इंजीनियर ने किया था जिसे उन्होंने 3 अप्रैल को 1973 को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया था। यह विश्व का पहला फोन था जो कि आम लोगों के लिए बनाया गया था क्योंकि इससे पहले रेडियो फोन और वायरलेस फोन भी उपलब्ध थे लेकिन इसका अधिकतर इस्तेमाल फौज द्वारा किया जाता था।

मार्टिन कूपर ने मैनहैटन में स्थित अपने ऑफिस से न्यूजर्सी में स्थित बेल लैब्स के मुख्यालय में पहला कॉल किया था। मार्टिन कूपर ने आज के समय के अग्रणी मोबाइल कंपनी मोटोरोला के साथ मिलकर इस मोबाइल फोन का निर्माण किया था तथा बाद में वे इस कंपनी के सीईओ भी बने।

मार्टिन कूपर को दुनिया के पहले मोबाइल फोन के निर्माण के कारण साल 2013 में संचार के क्षेत्र में किये गये विलक्षण कार्य के लिए मारकोनी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। दुनिया की पहली कमर्शियल सेल्युलर फोन सेवा 1979 में एनटीटी नामक जापानी कंपनी ने टोकीओ में शुरू की थी। इसके बाद 1981 में डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन में मोबाइल फोन सेवा शुरू हुई थी जिसका नाम था नॉर्डिक मोबाइल टेलीफोन। 1983 में अमेरिका के शिकागो शहर में अमेरिटेक नाम से 1G टेलीफोन नेटवर्क की शुरुआत हुई थी।

भारत में पहली मोबाइल सेवा 15 अगस्त 1995 को दिल्ली में गैर व्यावसायिक तौर पर शुरू की गई थी। आज भले ही हल्के और स्लिम फोन आ गए हैं लेकिन जिस मोबाइल से पहली कॉल की गई थी उसका वजन 1.1 किलोग्राम था। साथ ही ये मोबाइल 13 सेंटीमीटर मोटा और 4.45 सेंटीमीटर चौड़ा था जिसकी तुलना ईंट या जूते से की जाती थी।

जहां आज के मोबाइल को चार्ज होने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है और इसकी बैकअप क्षमता भी एक से दो दिन होती है वहीं दुनिया के पहले मोबाइल को पूरी तरह से चार्ज होने में 10 घंटे का समय लगता था और उसके बाद भी कैसे 20 मिनट तक ही चल पाता था।

पहले मोबाइल फोन की बैटरी का वजन आज की तुलना में चार से पांच गुना ज्यादा था। 1985 में मोटोरोला ने जिस पहले मोबाइल हैंडसेट को बाजार में उतारा था उसकी कीमत लगभग दो लाख रुपए थी। इस मोबाइल हैंडसेट का नाम Motorola Dynatac 8000X था।

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