केमिकल इंजीनियरिंग कैसे बने जानिए पूरी जानकारी के साथ?

कैमिकल इंजीनियर इंजीनियरिंग का एक न्यू डिसिप्लिन है जिसने बीते कुछ समय में काफी तेजी से अपनी जगह बनाई है और इस वजह से कैमिकल इंजीनियर की डिमांड भी काफी बढ़ी है।

ऐसे में अगर आप भी कैमिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं तो इस वीडियो को जरूर देखें क्योंकि आज क्विक सपोर्ट के इस वीडियो में हम आपको कैमिकल इंजीनियरिंग से जुड़ी सभी खास बातें बताने वाले हैं और इस वीडियो को देखने के बाद आप समझ जाएंगे कि कैमिकल इंजीनियर बनने के लिए आपको क्या करने की जरूरत है। तो चलिए शुरू करते हैं और केमिकल इंजीनियर बनने के इस प्रोसेस में सबसे पहले ये जानते हैं कि

कैमिकल इंजीनियर क्या करता है?

केमिकल इंजीनियरिंग में केमिस्ट्री और फिजिक्स के एप्लीकेशंस को मैथमेटिक्स के साथ मिलाकर रॉ मटीरियल और कैमिकल से यूजफुल और वैल्यूएबल फोन्स बनाई जाती है। कैमिकल इंजीनियर कैमिकल प्लांट्स के डिजाइन और मेनटिनेंस के लिए रिस्पॉन्सिबल होता है और रॉ मैटीरियल्स या केमिकल्स को डिफरेंट वैल्यूएबल फॉर्म्स में कनवर्ट करने का केमिकल प्रोसेस डेवलप करना भी केमिकल इंजीनियर की ही जिम्मेदारी होती है। यानि की कैमिकल इंजीनियर प्रोडक्ट मैन्युफैक्चर करने के मोस्ट कंबीनेशन मैथड को ढूंढने के लिए बेस्ट रिसोर्सेज का इस्तेमाल करते हैं।

कैमिकल इंजीनियर कोर्स

तो आइये अब कैमिकल इंजीनियर कोर्स के बारे में जानते हैं। सबसे पहले है डिप्लोमा इन कैमिकल इंजीनियरिंग। कैमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको टेंथ क्लास कम से कम फोर्टिफाइड परसेंट मार्क्स के साथ पास करनी होगी और साइंस और मैथमेटिक्स सब्जेक्ट्स में अच्छा स्कोर करना होगा। इसके अलावा आपका एक सब्जेक्ट इंग्लिश भी होना जरूरी है। इसके बाद आपको स्टेट गवर्मेंट के टेक्निकल एजुकेशन बोर्ड्स की तरफ से कंडक्ट किये जाने वाले एंट्रेंस टेस्ट को क्लियर करना होगा। इस एग्जाम में सेलेक्ट होने के बाद आप कैमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर सकते हैं। ये कोर्स करने के बाद आप जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर सकते हैं या फिर इंजीनियरिंग कोर्स के सेकंड ईयर में एडमिशन ले सकते हैं।

अब बात करते हैं बीइ यानि की बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग बीई केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स एक फुलटाइम अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम होता है। इस कोर्स की ड्यूरेशन चार साल की होती है और इस कोर्स को करने के लिए आपको टेन प्लस टू क्लास क्लीयर करने के अलावा एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने की जरूरत होगी और अगर आप इस कोर्स को सक्सेस के लिए कंप्लीट कर लेंगे तो आप के लिए बहुत सारी जॉब अपॉच्र्युनिटीज खुल जाएंगी और आप केमिकल प्लांट्स बायोटेक्नॉलजी एरोस्पेस फार्मास्युटिकल्स और टेक्सटाइल मेन्युफेक्चरिंग इंडस्ट्रीज में अपना करियर बना सकते हैं। इस कोर्स में स्टूडेंट्स को केमिस्ट्री के प्रिंसिपल्स और इंजीनियरिंग के साथ लिंक करके केमिकल्स के यूज और प्रोडक्शन में आने वाली प्रॉब्लम्स के बारे में समझाया जाता है। इस सब्जेक्ट स्टूडेंट्स में लीडरशिप स्किल्स प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और प्रोजेक्ट डिजाइनिंग स्किल्स डेवलप करता है।

कैमिकल इंजीनियर के लिए एलिजिबिलिटी

एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया बीइ केमिकल इंजीनियरिंग करने के लिए आपको 10th और +2 क्लास साइंस स्ट्रीम से पास करनी होगी जिसमें आपके पास फिजिक्स, मैथमेटिक्स और केमेस्ट्री सब्जेक्ट्स होनी चाहिए और इन सब्जेक्ट्स में आपका स्कोर अच्छा भी होना चाहिए।

केमिकल इंजीनियरिंग के लिए एडमिशन प्रोसेस

अब जानते हैं एडमिशन प्रोसेस के बारे में 10th और +2 क्लास साइंस पीसीएम से क्लियर करने के बाद आपको आल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन ( AIEEE ) क्लियर करना होगा। अगर आप आईआईटी में एडमिशन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको जेइइ यानि कि ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन क्लियर करना होगा। ऐसे कैंडिडेट्स जिन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रखा हो उन्हें इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एसोशिएट मेंबरशिप ऑफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स ( AMIE ) पास करना जरूरी होता है।

इसके अलावा बहुत से कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज भी अलग अलग एंट्रेस टेस्ट कंडक्ट करवाती हैं जैसे कि बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी इनसाइट्स एडमिशन टेस्ट, मणिपाल यूनिवर्सिटी ऑनलाइन एंट्रेंस टेस्ट, वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन, ऐसाराम यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन।

केमिकल इंजीनियरिंग कॉलेजेस के नाम

अब आपको कुछ ऐसे कॉलेजेस के नाम बतातें हैं जो कैमिकल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन के कोर्स ऑफर करते हैं जैसे कि बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस पिलानी, अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी बॉम्बे, विश्वेश्वरैया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी नागपुर, चंडीगढ यूनिवर्सिटी, मनिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी मनिपाल, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी मद्रास चेन्नई, आईआईटी खड़गपुर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी, आईआईटी रुड़की इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी।

केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स करने के बाद क्या करे

बीइ कैमिकल इंजीनियरिंग कोर्स कंप्लीट करने के बाद आप प्राइवेट और गारमेंट सेक्टर में जॉब के लिए तैयार हो जाएंगे और कैमिकल इंजीनियर, टेक्निकल ऑपरेटर, साइट इंजीनियर, डेवलोपमेन्ट केमिकल इंजीनियर जैसे फील्ड में अपना करियर शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा अब प्रोसेसिंग, ऑपरेशंस, मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, कंस्ट्रक्शन, फिनांस, टीचिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट फील्ड्स में से भी सूटेबल ऑप्शंस चूज कर सकते हैं।

अगर आप ग्रैजुएशन के बाद एकेडमिक्स और रिसर्च वर्क करना चाहते हैं तो आप केमिकल इंजीनियरिंग में एमइ और पीएचडी भी कर सकते हैं। केमिकल इंजीनियर के रूप में करियर स्टार्ट करने के लिए आपको बहुत से अलग अलग ऑप्शंस मिलेंगे जिनमें पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल्स जैसे ऑप्शंस भी होंगे तो फूड, मैटीरियल्स, स्पेशियलिटी केमिकल्स, प्लास्टिक, पावर प्रॉडक्शन, एनवायरमेंट कंट्रोल के अलावा वेस्ट मैनेजमेंट और बायोटेक्नॉलजी भी शामिल होगा।

केमिकल इंजीनियरिंग की सेलेरी

जहां तक सेलेरी की बात है दोस्तो तो केमिकल इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू करने पर आपको तीन से चार लाख महीने सैलरी मिल सकती है और साइट इंजीनियर और मटीरियल्स इंजिनियर की पोस्ट पर रहते हुए भी आप तीन से चार लाख महीने सैलरी पा सकते हैं। अगर आप डिवेलपमेंट केमिकल इंजीनियर या एनालिटिकल केमिस्ट के रूप में अपना करियर शुरू करेंगे तो आप 4 से 5 लाख तक कमा सकते हैं।

वहीं एनर्जी मैनेजर और माइनिंग इंजीनियर की पोजिशन आपको 6 से 8 लाख महीने सैलरी दिला सकती है और टेक्निकल ऑपरेटर रहते हुए 1 से 2 लाख रुपए महीने सैलरी भी कमाई जा सकती है। यह सैलरी आपकी स्किल्स एक्सपीरियंस और उस ऑर्गनाइजेशन पर डिपेंड करेगी जिससे आप जुड़ेंगे। एक बार फ्रेशर के रूप में स्टार्ट करने के बाद जैसे जैसे आप अपनी स्किल्स और एक्सपीरियंस बढ़ती जाएंगे आपको मिलने वाली सैलरी बढ़ती जाएगी इसलिए आप सिर्फ अपनी स्किल्स और नॉलेज पर वर्क करिए पैसा अपने आप आती जाएगी।

केमिकल इंजीनियरिंग बनने के लिए टिप्स

आप जानते हैं कि कैमिकल इंजीनियर बनने के लिए आपके अंदर कुछ खास स्किल्स का होना भी जरूरी है जैसे आपकी मैथ्स और साइंस स्किल्स अच्छी होनी चाहिए और केमिस्ट्री पर आपकी कमांड होनी चाहिए। प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स और एनालिटिकल स्किल्स के साथ आपमें प्लानिंग और ऑर्गनाइज नेशनल एबिलिटी भी होना जरूरी है। प्रोजेक्ट्स, बजट और लोगों को मैनेज करने की एबिलिटी के अलावा एक्सीलेंट आईटी स्किल्स की भी जरूरत होगी। आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स भी स्ट्रांग होनी चाहिए साथ ही सुपरवाइजरी स्किल्स की भी आपकी पर्सनैलिटी का हिस्सा होती है। दोस्तो अब आप केमिकल इंजीनियर बनने की प्रोसेस को समझ चुके हैं।

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