हेलो दोस्तो कैसे हो आप लोग उम्मीद करता हूं आप सब अच्छे होंगे। आप सभी को HindiMePro वेबसाइट में स्वगात है। आज फिर से आपके लिए और एक नया पोस्ट लेके आया हूं आज में आपको जीएसटिन क्या है, जीएसटिन का फुल फॉर्म क्या है ( GSTIN Full Form In Hindi ), जीएसटिन नंबर, जीएसटिन पंजीकरण के बारे में बताऊंगा तो चलिए जानते है।

जीएसटिन नंबर क्या होता है?

सबसे पहले हम यह समझते हैं कि जीएसटिन नंबर क्या होता है। तो दोस्तों जीएसटिन एक शॉर्ट्स फॉर्म है जिसका फुल फार्म होता है माल एवं सेवा कर पहचान संख्या अंग्रेजी भाषा में यदि आप इसे करेंगे तो गुड्स एंड सर्विस टेक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर कहा जाता है।

दोस्तो मुझे यकीन है कि आपने पहले वैट का नाम सुना होगा। यह जो वैट है पहले जितनी भी राज्य सरकारें थीं वह जिस टैक्स को लेती थी वह टैक्स वैट के अंतर्गत आता था। इसी प्रकार यदि कोई ऐसी कंपनी है या ऐसी कोई फर्म है जो किसी प्रकार के गुड्स का निर्माण कर रही है यानी कोई सामान बना रही है तो उस पर जो टैक्स लगता था उसको सर्विस टैक्स कहा जाता था।

ऐसे कारोबारी जो वैट सिस्टम के अंतर्गत अपना कारोबार किया करते थे उनके लिए टिन नंबर जारी किया जाता था और ऐसे कारोबारी जो सर्विस टैक्स के अधीनस्थ कार्य किया करते थे उनके लिए केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा एक नंबर जारी किया जाता था। अब जीएसटी के लागू होने से पहले बहुत सारे डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स का जाल सा फैला हुआ था।

अब वर्तमान में जो भारत सरकार है यह इन सभी टैक्सों के जाल को समाप्त किया और इन सभी टैक्स को समाप्त करने के बाद ये टैक्स का प्रावधान शुरू किया जिसे हम जीएसटी के नाम से जानते हैं। अब जीएसटी का मतलब क्या है? जीएसटी का मतलब यह है गुड्स एंड सर्विस टैक्स अब जीएसटी लागू होने के साथ जितने प्रकार के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्सों का जो जाल था वह समाप्त हो गया और इन सभी टैक्सों की जगह पर यह टैक्स लागू हुआ जिसको जीएसटी कहते हैं और इन सभी टैक्सों के लिए जो नंबर जारी किया गया उसको हम जीएसटिन नंबर कहते हैं यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर कहा जाता है।

जीएसटिन की आवश्यकता क्या है?

अब जीएसटी पर रजिस्टर कराने पर किसी भी कारोबारी को उसका यूनीक पहचान नंबर अर्थात जीएसटिन मिलता है। सामान्य बोलचाल की भाषा में ही आप इसे जीएसटी एकाउंट भी कहते हैं। किसी भी प्रकार के समान अथवा किसी भी प्रकार की सर्विस से जुड़े हुए कारोबारी को यह जीएसटिन लेना अनिवार्य होता है भले ही वह कंपोजिट स्कीम का व्यापारी हो अथवा किसी भी प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करता हो भले ही वह रेस्टोरेंट चलाता हो अथवा किसी अलग क्षेत्र में अपना व्यवसाय करता हो उसको जीएसटिन लेना जरूरी है।

जीएसटिन का फुल फॉर्म – GSTIN Full Form In Hindi

  • GSTIN Full Form In English – Goods and Services Tax Identification Number
  • GSTIN Full Form In Hindi – माल और सेवा कर पहचान संख्या
  • GSTIN Full Form In Marathi – वस्तू आणि सेवा कर ओळख क्रमांक
  • GSTIN Full Form In Gujrati – વસ્તુઓ અને સેવાઓ કરની ઓળખ નંબર

जीएसटिन की उपयोगिता क्या है?

आप यह समझते हैं कि जीएसटिन की उपयोगिता क्या होती है तो दोस्तों जीएसटिन नेटवर्क में सभी नंबर जो होती हैं वह एक दूसरे से कनेक्ट होते हैं। इसका लाभ यह होता है कि इससे किसी भी जगह एक एकाउंट पर दर्ज की गई सूचना उस एकाउंट धारक के पास अपने आप पहुंच जाती है। वस्तुओं के कोड के आधार पर उन वस्तुओं की खरीद और विक्रय पर उस व्यापारी की टैक्स लायबिलिटी उसके जीएसटी एकाउंट में अपने आप दिखाई देने लगती है।

इस कारण वह व्यापारी होता है उसके ऊपर कोई अधिक मानसिक दबाव नहीं पड़ता है। किसी सामान का बिक्री करने वाला जो व्यापारी है जैसे ही अपनी बिक्री रिटर्न में उस सामान की बिक्री को जीएसटि नंबर के साथ इंट्री करता है आगे चल कर उस सामान की क्रय करने वाले व्यापारी को अपने जीएसटी एकाउंट में वह इंट्री अपने आप दिखाई देने लगती है। इसकी वजह से खरीदारी का रिटर्न भरते समय जो क्रेता व्यापारी है उसको यह जानकारी अलग से दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती।

यदि किसी व्यापारी के एकाउंट में किसी लेन देन की इंट्री में किसी भी प्रकार की गलती दर्ज हो जाती है या फिर कुछ कम या कुछ ज्यादा हो गया होता है तो उस व्यापारी के पास इसे सुधार करने का या फिर जो गलत इंट्री हुई है उसको हटाने का विकल्प मौजूद होता है। जीएसटिन की एक महत्वपूर्ण उपयोगिता है जोकि यह है यह स्कीम लागू होने के बाद सभी कारोबार की जानकारी का जो रिकार्ड है वह आनलाइन हो गया है।

अब इसकी वजह से कोई भी व्यापारी अपने द्वारा किसी भी क्रय या विक्रय को नहीं छुपा सकेगा और इस कारण जो टैक्स चोरी की संभावनाएं हैं वो काफी कम हो जाएंगी और सरकार के पास पहले से कहीं ज्यादा राजस्व इकट्ठा होने लगेगा। अब जीएसटी लागू हो जाने के बाद टैक्स की अधिकारी हैं उनको इसकी निगरानी करने में काफी सफलता और सहूलियत मिलेगी।

जीएसटिन नंबर की संरचना

दोस्तो समझते हैं जीएसटिन की जो नंबर्स होते हैं उनकी संरचना किस आधार पर की जाती है। तो प्यारे साथियों हो सकता है आपको यह पता हो वर्ष 2011 में जब जनगणना तो उसके बाद हर राज्य सरकार को दो अंकों का कोड दिया। जैसे यदि ग्रहण की बात करें तो दिल्ली का जो कोड है वह है 07 इसी तरह से आसाम का कोड है 18 यूपी का कोड है 9 अब जीएसटिन नंबर को ध्यान से देखेंगे तो इसमें 15 डिजिट होते हैं।

अब इस 15 डिजिट के प्रथम के जो दो अंक हैं वह उस राज्य के इसी कोड को दिखाते हैं। आप इसको इस प्रकार से भी समझ सकते हैं कि इसे मान लीजिए दिल्ली का कोई कारोबारी है तो उसका जो जीएसटिन नंबर होगा उसके जीएसटिन नंबर का जो पहला दो अंक है वो 07 ही होगा। इसी प्रकार से यदि कोई कारोबारी है जो आसाम से कार्य करता है तो उसके जीएसटिन नंबर का जो पहला दो कोड होगा वह 18 होगा। अब यदि कोई यूपी का कारोबारी है तो उसके जीएसटिन नंबर का जो पन्ना दो अंक है वो 09 होगा।

अब यदि आप यदि नंबर के तीसरे अंक से लेकर 12वें नंबर तक को यदि आप ध्यान से देखेंगे तो यात्री यदि नंबर जिस व्यापारी ने बनवाया होगा उस व्यापारी का पैन नंबर जो होता है वह तीसरे अंक से लेकर और 12वीं अंक तक दिखता है।

अब बात करते हैं जीएसटी के तिराहे की तो जीएसटीएन के 13वें डिजिट की संख्या अब व्यापारी के व्यवसाय की संख्या को प्रदर्शित करता है। दोस्तो इसको उदाहरण के लिए इस प्रकार से समझ सकते हैं कि ऐसा कोई व्यापारी है जो तीन तरह का व्यवसाय या तीन तरह का व्यापार करता है। अब यदि वह व्यक्ति अपने प्रथम व्यापार के लिए जीएसटी नंबर के लिए रजिस्टर करेगा तो उसके प्रथम व्यवसाय के लिए जो रजिस्टर जीएसटिन नंबर होगा उसका 13वां डिजिट 1 होगा। इसी प्रकार जब वह व्यापारी अपने दूसरे व्यवसाय के लिए जीएसटी नंबर रजिस्टर कराएगा तो जो 13वां डिजिट होगा वह 2 होगा।

अब दोस्तो हम बात करते हैं 14वें डिजिट की मेरी जानकारी के अनुसार जीएसटिन नंबर के जो 14वां डिजिट होता है उसमें लगभग भारत में जितनी भी जीएसटिन नंबर अभी तक बने हुए हैं उसमें अब कुछ जगह लिखा हुआ ही मिलेगा। अब इस 14वें डिजिट का अर्थ क्या है मैं इसको नहीं समझ पा रहा हूं लेकिन मेरा ऐसा अनुमान है कि यह दूसरा 14वां डिजिट शायद इसको विकल्प के रूप में भारत सरकार ने रखा हुआ है। हो सकता है इसका उपयोग भविष्य में अपने तरीके से गवर्नमेंट करने के लिए कोई निर्णय ले।

अब दोस्तो बात करते हैं आखरी यानि 15 डिजिट की। दोस्तो हमें लगता है कि जीएसटिन का यदि पनामा डिजिट है यह जी एस3 के पहले अंक से लेकर 14वें डिजिट तक के जितनी भी नंबर हैं यह कंप्यूटर अपने आप इसका एक कैलकुलेशन करता है और उसके बाद एक चेक सम डिजिट नंबर को दे देता है। मिली जानकारी के अनुसार इस डिजिट के कारण कंप्यूटर को उस एकाउंट में हो रही गलतियों को तेज गति से पकड़ने में सहायता मिल जाती है। तो दूसरों में यह उम्मीद करता हूं कि जीएसटी नंबर की जो फार्मेट है उसके विषय में अब आपको जानकारी हो गई होगी।

जीएसटिन और जीएसटीएन का क्या अर्थ होता है?

दोस्तो हम समझते हैं कि जीएसटिन और जीएसटीएन इन दोनों का क्या अर्थ होता है दोस्तो मुझे यह यकीन है कि जीएसटिन के विषय में तो जानकारी आपको हो गई होगी। वास्तव में ये एक प्रकार का एकाउंट नंबर है जिसको की साधारण बोलचाल की भाषा में हम आप जीएसटी एकाउंट नंबर भी कहते हैं या जो एकाउंट नंबर होता है इसके जरिए व्यापारी अपनी क्रय विक्रय का रिकार्ड दर्ज करता है जिसका उपयोग टैक्स जमा करने के लिए किया जाता है।

अब बात उठती है जीएसटीएन की तो जीएसटीएन इस प्रकार का सिस्टम है जिसे साधारण भाषा में गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क कहा जाता है। जीएसटीएन कारण आईटी सिस्टम को मैनेज किया जाता है। ये जोजीएसटीएन  है ये ऑनलाइन माध्यम से सभी जीएसटीएन से जुड़े हुए सौदों को नियंत्रित करता है।

जीएसटिन रजिस्टर

अब दोस्तो हम समझते हैं कि जीएसटिन के लिए किन लोगों को रजिस्टर कराना बहुत जरूरी है अनिवार्य है। तो जैसा कि अभी तक आपने देखा और जाना कि कोई भी व्यक्ति जो लेन देन कर रहा है उसके लिए जीएसटिन नंबर होना जरूरी है। यदि इस आधार पर यदि समाज को कैटिगरी में बांटा जाए तो तीन तरह की कैटिगरी आपको देखने को मिलेगी। पहला होता है कस्टमर या फिर कंज्यूमर। दूसरा व्यक्ति होता है जिसको कि हम वन टाइम सेलर कह सकते हैं और वो तीसरी कैटिगरी होती है वह होती है डीलर्स सप्लायर या फिर बिजनेसमें।

अब हम बात करते हैं सबसे पहले कैटिगरी की यानी कंज्यूमर या कस्टमर की। दोस्तो हम और आप किसी वस्तु के कस्टमर या कंज्यूमर यानी हम किसी वस्तु को सिर्फ अपने उपयोग के लिए अपने यूज के लिए खरीद रहे हैं तो किसी भी कस्टमर या कंज्यूमर को जीएसटिन नंबर के लिए रजिस्टर होना जरूरी नहीं है।

अब दोस्तो बात आती है वन टाइम सेलर की। इसको इस प्रकार से समझ सकते हैं जैसे मान लीजिए आपने कोई सामान खरीदा हुआ है। अब इस सामान में आपकी फोर व्हीलर हो सकती है टू व्हीलर हो सकती है फ्रीज हो सकता है टेलीविजन है मगल कोई भी एक ऐसा सामान जिसको आपने अपने उपयोग के लिए खरीदा।

आपने एक लंबे समय तक उस सामान का उपयोग किया और उसके बाद अब आपके मन में आ रहा है कि हम इस सामान को बेचने और फिर उसके बाद एक नया सामान हम खरीद लें। अब चूंकि यहां भी क्रय और विक्रय की बात आ रही है तो क्या ऐसी वन टाइम सेलर को जीएसटिन नंबर लेना होगा। दोस्तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं। चूंकि हम वह जो सामान है उसका क्रय विक्रय करके कोई व्यवसाय कोई बिजनेस नहीं कर रहे हैं इसलिए हमारे लिए जीएसटिन नंबर रजिस्टर कराना जरूरी नहीं होगा।

अब बात आती है डीलर सप्लायर या फिर बिजनेसमैन की तो दोस्तो यहां तो मैं आपको जानकारी देना जरूरी समझता हूं कि यदि कोई डीलर है सप्लायर है या कोई बिजनेसमैन है यदि उसकी जो सालाना टर्न ओवर है वह 40 लाख रुपये से अधिक का है तो ऐसे डीलर सप्लायर या फिर बिजनेसमैन के लिए जीएसटिन का रजिस्ट्रेशन होना बहुत जरूरी है अनिवार्य है लेकिन यदि ऐसा कोई डीलर सप्लायर या फिर बिजनेसमैन जिसका की सालाना टर्नओवर 40 लाख से कम है तो फिर उसके लिए जीएसटिन नंबर रजिस्टर कराने की जो अनिवार्यता है या जो बाध्यता है वो नहीं होगी।

वह व्यक्ति चाहे तो जीएसटी के लिए रजिस्टर करा सकता है और यदि वह न चाहे तो वह रजिस्टर नहीं करा सकता है। जीएसटी नंबर की रजिस्ट्रेशन कराने से उस डीलर सप्लायर और बिजनेसमैन को कई तरह के लाभ भी होते हैं। तो यदि आप चाहें तो आप उसको रजिस्टर करा सकते हैं और यदि आप नहीं चाहें तो यह जीएसटी नंबर के लिए रजिस्टर्ड रजिस्टर नहीं करा सकते हैं। यदि आपका सालाना दो टर्न उभरे व 40 लाख से कम है तब।

आज हमने क्या सीखा

आज की पोस्ट में हमने जीएसटिन क्या है, जीएसटिन नंबर, जीएसटिन का फुल फॉर्म ( GSTIN Full Form In Hindi ) बारे में जाना है। उम्मीद करता हूं ये पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा अच्छा लगा होगा तो इस पोस्ट को आप अपनी दोस्तो के साथ जरूर शेयर कर देना उनको भी पता चले की जीएसटिन के बारे में। जय हिन्द।

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Hi, I'm Mantu Sing, में hindimepro.in वेबसाइट का संस्थापक हूं। में इस वेबसाइट में जीबनी परिचय, फुल फॉर्म, जानकारी के बारे में पोस्ट लिखता हूं।

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