हेलो दोस्तो कैसे हो उम्मीद करता हूं आप सब अच्छे होंगे आप सभी को hindimepro.in वेबसाइट मे स्वागत है आज फिर से आपके लिए और एक नया पोस्ट लेके आया हूं जो की है भारत को सोने की चुडिया क्यों कहा जाता है के बारे मे। मे उम्मीद करता हूं इसके बारे मे आपको पूरी जानकारी दूंगा इसके बाद आपको और दूसरा पोस्ट देखने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

भारत को सोने की चुडिया क्यों कहा जाता है

हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं कि भारत सोने की चिड़िया हुआ करता था और यही कारण रहा कि विदेशी आक्रांताओं और अंग्रेजों ने इस देश को अपना गुलाम बनाया और अपार संपत्ति इस देश से लूटकर ले गए थे।

लेकिन ये बात किन तथ्यों से की जाती है हमने कभी इसके बारे में जानने की कोशिश नहीं की। लेकिन इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि आखिर भारत को सोने की चिड़िया किन तथ्यों के आधार पर कहा जाता था। कभी भारत वैश्विक व्यापार का केन्द्र हुआ करता था। कुछ लोग मानते हैं कि भारत प्राचीन काल में केवल मसालों के निर्यात में आगे था। भारत मसालों के अलावा कई अन्य उत्पादों के निर्यात में भी अग्रणी देश था।

जैसे खाद्य पदार्थों कपास रत्न हीरे इत्यादि इन सब के निर्यात में भारत विश्व में सबसे आगे था। भारत उस समय विश्व का सबसे बड़ा निर्माण केंद्र यानि मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर भी रहा। भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में कपास चावल चीनी गेहूं जबकि मसालों में मुख्य रूप से हल्दी काली मिर्च दालचीनी जटा मासी इत्यादि शामिल थे। इसके अलावा आलू नील तिल का तेल हीरे नीलमणी आदि के साथ साथ पशु उत्पाद रेशम चमड़े पत्र शराब और धातु उत्पाद चाँदी के बने पदार्थ आदि निर्यात किये जाते थे। वहीं आयात की जाने वाली वस्तुओं में सोने के रोमन के सिक्के कांच के बने पदार्थ दवाएं टिन ताम्बे चांदी के बने आभूषण कपड़े आदि शामिल हुआ करते थे।

भारत। विश्व का सबसे बड़ा व्यापारी हजार वर्षों के मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों के शासन के बाद भी विश्व की जीडीपी में भारत की अर्थव्यवस्था का योगदान 25 प्रतिशत के बराबर रहा। और ठीक इसी समय में अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा कर लिया और जब अंग्रेज भारत को छोड़कर गए तो भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान मात्र दो से तीन प्रतिशत रह गया। लेकिन आज फिर से भारत विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। मुगलों के शासन शुरू करने से पहले भारत एक इसवी और हजार इस्वी के बीच दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी।

जब मुगलों ने 15 से 26 से 1797 के बीच भारत पर शासन किया उस समय भारत की आय 17.5 मिलियन पाउंड यानी ग्रेट ब्रिटेन की आय से अधिक थी। वर्ष 16 सौ इसवी में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी तेरह सौ पांच डॉलर थी जबकि इसी ब्रिटेन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1137 डॉलर थी। अमेरिका की प्रति व्यक्ति जीडीपी 897 डॉलर और चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 940 डॉलर थी।

इतिहास बताता है कि मीर जाफर ने सत्रह सौ सत्तावन में ईस्ट इंडिया कंपनी को 3.9 मिलियन पाउंड का भुगतान किया था। सिर्फ ये तथ्य ही भारत की संपन्नता को दर्शाने के लिए बड़ा सबूत है। पंद्रह सौ इस्वी के आसपास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5 पड़ती थी जो कि पूरे यूरोप की आय के बराबर थी। भारत देश सिक्कों को बनाने वाले पहले देशों में शामिल था। 600 ईसा पूर्व के आस पास महाजनपद सोने चांदी के सिक्के के साथ सिक्का प्रणाली शुरू की थी। ग्रीक के साथ साथ पैसे पर आधारित व्यापार को अपनाने वाले पहले देशों में भारत का स्थान अग्रणी था।

लगभग 300 ईसा पूर्व चाणक्य जी ने भी भारत में मौर्य साम्राज्य के लिए आर्थिक संरचना की नींव डाली थी। भारत को सोने की चिड़िया कहने के पीछे एक सबसे बड़ा कारण हुआ करता था। वो था मयूर सिंहासन जिसे तकते ताउम्र भी कहते हैं। कहा जाता था कि इस सिंघासन को बनाने के लिए जितना धन लगाया गया था उतने ही धन में दो ताजमहल का निर्माण किया जा सकता था। लेकिन साल 17 सौ 39 में इरान के शासक नादिर शाह ने एक युद्ध जीतकर इस सिंहासन को हासिल कर लिया। मयूर सिंहासन का निर्माण सहजाद द्वारा 17वीं शताब्दी में शुरू किया गया।

इतिहासकारों के अनुसार मयूर सिंहासन को बनाने के लिए करीब एक हजार किलो सोने और बेश कीमती पत्थरों का प्रयोग किया गया था। मयूर सिंहासन की कीमत उसमें लगे कोहिनूर हीरे के कारण बहुत ही बढ़ गई थी। आज के जमाने में मयूर सिंहासन की अनुमानित कीमत 450 करोड़ रुपए की है। इतना कीमती होने के कारण ही नादिरशाह इसे लूटकर ले गया था। सन् 17 सौ 47 में नादिरशाह की हत्या के समय अचानक यह सिंहासन गायब हो गया और उसका कोई अता पता नहीं चला और आज भी ये सिंहासन लापता है लेकिन समय समय पर सरकारें इसका पता लगाने का प्रयास भी करती रहती हैं।

कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरे का वजन 21.6 ग्राम है और भारत में इसकी वर्तमान कीमत एक अरब डॉलर के लगभग आंकी जाती है। ये हीरा गोलकुंडा की खदान में मिला था और दक्षिण भारत के क्रांतिकारी राजवंश को इसका प्राथमिक हकदार माना जाता है। कई मुगल वे फारसी शासकों से होता हुआ अंततः इसे ब्रिटिश शासन ने अपने। लिया और आजकल ये ब्रिटेन की महारानी के मुकुट में जड़ा हुआ है। कई स्रोतों के अनुसार कोहिनूर हीरा लगभग पाँच हजार वर्ष पहले मिला था और प्राचीन संस्कृत इतिहास में लिखे अनुसार इसे स्वयं तक मनी कहा जाता था।

कथाओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ये मनी जामवंत जी से ली थी जिनकी पुत्री जामवंत ने बाद में श्री कृष्ण से विवाह भी किया था। कोहिनूर हीरे को दुनिया के सभी ही रोकर राजा कहा जाता है। महमूद गजनवी की लूट। महमूद गजनवी का सोमनाथ के मंदिर पर हमला करने के पीछे दो सबसे बड़े उद्देश्य थे। पहला इस्लाम का प्रचार करना और दूसरा भारत से धन की लूट करना। महमूद गजनवी ने नवंबर 1000 1 में पेशावर के युद्ध में जयपाल जोकि 964 से 1000 इस्वी तक हिन्दू शाही राजवंश के शासक थे उनको हराया था गजनी ने इस युद्ध में किले से 4 लाख सोने के सिक्के लूटे जिसमें एक सिक्के का वजन 120 ग्राम था।

इसके अलावा उसने राजा के लड़कों तथा राजा जयपाल को छोड़ने के लिए भी 4.5 लाख सोने के सिक्के लिए थे। इस प्रकार उसने आज के समय के हिसाब से लगभग एक अरब डॉलर की लूट सिर्फ राजा जयपाल के यहां की थी जबकि उस समय भारत में जयपाल जैसे बहुत से धनी राजा मौजूद थे। सोमनाथ मंदिर की लूट सन 1025 में महमूद गजनी ने गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर लूटा और इसका ज्योतिर्लिंग भी तोड़ दिया। इस आक्रमण से उसने 2 मिलियन दिनारा की लूट की जिसकी अनुमानित कीमत आज की तारीख में 45 करोड़ रुपए के लगभग बैठती है और उस समय के हिसाब से ये बहुत बड़ी लूट थी।

मंदिरों में सोने के भंडार। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कुछ समय पहले एक आंकलन में कहा था कि भारत में अभी भी 22 हजार टन सोना लोगों के पास है जिसमें से लगभग 3 हजार से 4 हजार टन सोना भारत के मंदिरों में है। एक अनुमान के मुताबिक भारत के 13 मंदिरों के पास भारत के सभी अरबपतियों से भी ज्यादा धन है। यदि मंदिरों के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाये तो भारत कल भी सोने की चिड़िया था और आज भी है।

भारत के कुछ मंदिरों में तो इतना सोना रखा हुआ है कि भारत के कुछ राज्यों की पूरी आय भी मंदिरों की आय से कम है। अगर वर्ष 2000 18 से 2000 19 के आँकड़े देखें तो पता चलता है कि केरल सरकार की वार्षिक आय 1.03 लाख करोड़ है जोकि केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर के किसी गौरव ग्रैब के एक कोने में ही पड़ा मिल जाएगा।

ये थोड़े से आकड़े ही काफी हैं सिद्ध करने के लिए कि प्राचीन भारत में अपार संपत्ति थी जिसके कारण यहां पर विदेशी आक्रमणकारियों के हमले होते रहे। लेकिन अगर बीते समय को छोड़कर वर्तमान में देखा जाए तो भारत की स्थिति विकसित देशों की तुलना में निश्चित रूप से खराब है लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं है कि भारत पूरे विश्व में बहुत तेजी से अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहा है और वो समय भी बहुत जल्द आएगा जब लोग इस देश को फिर से सोने की चिड़िया के नाम से बुलाने लगेंगे और जहां तक हमें लगता है इसकी शुरुआत 2014 में हो गई थी।

अब आप बताएं क्या भारत फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है। हमें अपनी राय जरूर दें।

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आखिरी बात

अब आपको पता चल गया होगा की भारत को सोने की चुडिया क्यों कहा जाता है। मेने आपको पूरी जानकारी के साथ बताया है भारत को सोने की चुडिया क्यों कहा जाता है।उम्मीद करता हूं ये पोस्ट मे आपको पूरी जानकारी मिला हो भारत की सोने की चुडिया के बारे मे। तबतक के लिए जय हिन्द।

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