आपको HindiMePro वेबसाइट में स्वागत है। इस पोस्ट में मेने अताउल्ला खान की जीबनी परिचय परिचय के बारे में बताया है की उनको जन्मदिन कब है और वो सिंगर कैसे बने।

अताउल्ला खान की जीबनी परिचय

19 अगस्त 1951 को पैदा हुए अताउल्ला खान को बचपन से संगीत सीखने की तमन्ना थी। परेशानी यह थी कि उनकी गायकी उनके अब्बा को बिल्कुल नहीं सुहाती थी। बात यहां तक बिगड़ गई कि उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया। इसे माता उल्ला खान जब वापस घर लौटे तो उनके पास गायकी का इकलौता समय तब होता था जब उनके अब्बा घर पर नहीं होते थे। कहते हैं कि जब उनके बाप हज पर चले जाते थे तो अताउल्ला खान गाना गाते थे। उनके स्कूल में एक टीचर जरूर थे जिन्होंने अताउल्ला खान को मोहम्मद रफी और मुकेश के गाने सुनते रहने और गाते रहने की नसीहत दी। ये नसीहत वह कई में काम आ गई।

अताउल्ला खान लाख बंदिशों के बाद भी अपनी गायिकी को जारी रखने में कामयाब हुए। 18 साल की उम्र में जब उन्हें समझ में आ गया कि अब्बा और बाकी घरवाले उनके इस शौक के रास्ते में हमेशा बंदिशें लगाएंगे तो उन्होंने घर हीं चढ़ दिया। अगले तीन साल में वो उस रास्ते पर पहुंच गए जहां से उन्हें वो मुकाम हासिल हुआ जिसके वो हकदार थे।

1972 में उन्हें बहावलपुर के रेडियो पाकिस्तान में गायिकी का न्योता मिला। अगले ही साल वो टीवी के एक लोकप्रिय कार्यक्रम में फीचर किए गए। 21-22 साल की उम्र में अताउल्ला खान पाकिस्तान के एक पहचान वाले चेहरे बन चुके थे। उनकी शोहरत और परवान चढ़ी जब 1977 में फैसलाबाद की एक कंपनी ने उनका कैसेट रिलीज किया। देखते ही देखते वो कैसेट बेस्टसेलर बन गए। जल्द ही पाकिस्तान के बाहर भी अताउल्ला खान की बात होने लगी। उन्हें इंग्लैंड बुलाया गया। वहां उन्होंने कार्यक्रम पेश किए। उनका पाकिस्तान के बाहर पहला कार्यक्रम था। धीरे धीरे उनकी लोग गायकी बाबू लेखा के कलम और उनकी आवाज का दर्द लोगों को भी भा गया।

अताउल्ला खान महज 40 साल के थे जब उन्हें पाकिस्तान के एक बड़े सम्मान से नवाजा गया। इसी किताब के अगले साल गुलशन कुमार ने उनका कैसेट रिकॉर्ड किया। अताउल्ला खान की आवाज हिंदुस्तान पहुंची और उसी के साथ पहुंची वो कहानी जिसका जिक्र हमने शुरू में किया था। खैर 1994 में अताउल्ला खान को ब्रिटेन की महारानी ने भी सम्मानित की। इसी दौरान सात भाषाओं में करीब 50 हजार गाने रिकॉर्ड करने वाले अताउल्ला खान का नाम गिनीज बुक का वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ।

संगीत के शौकीन लोगों में जबरदस्त पॉपुलर कोक स्टूडियो की रिकॉर्डिंग में भी अताउल्ला खान अपनी गायकी का जलवा बिखेर चुके हैं। दिलचस्प बात ये है कि अताउल्ला खान की आवाज भले ही 90 के दशक में हिंदुस्तान पहुंच चुकी थी लेकिन वो खुद 2014 में पहली बार हिन्दुस्तान आये पुराना किला में उनका कार्यक्रम हुआ। हिन्दुस्तान से जाते जाते उन्होंने दोनों मुल्कों के आवाम के बीच की दूरियों को कम करने का संदेश दिया।

अताउल्ला खान की गायकी का एक पहलू सोनू निगम से भी जुड़ा हुआ। मोहम्मद रफी साहब के गाने गा कर अपनी जमीन तलाश रहे सोनू निगम के लिए बेवफा सनम का गाना अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का वरदान साबित हुआ। अताउल्ला खान के इस गाने की पॉपुलैरिटी ने सोनू निगम के लिए बतौर प्लेबैक सिंगर टेकऑफ का जरिया बन गई।

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